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मीत बनारसी

सच ही कहा गया है कि हम अपनी परिस्थितियों के लिये स्वयं ज़िम्मेदार होते हैं अब उदाहरण के तौर पर ले लीजिये कि एक व्यक्ति अचानक से हमारे जीवन में आता है और हम उसकी हर बात पर आँखें मूँद कर विश्वास कर लेते हैं । उसके द्वारा कही गयी हर बात हमें सच लगने लगती है और अचानक एक दिन वो व्यक्ति कुछ ऐसा कर जाता है जो हमें भीतर तक झकझोर कर रख देता है और हम टूटकर अवसाद में चले जाते हैं पर बात यहीं समाप्त नहीं होती है । हम उस अवसाद की स्थिति में भी उसी व्यक्ति का साथ ढूँढ रहे होते हैं । हम ये भूल जाते हैं की आज हमारी ये स्थिति उस शख़्स की वजह से ही हुई है । शायद इस स्थिति के लिये कोई दूसरा शख़्स नहीं स्वयं हमारी सोच ज़िम्मेदार है । अगर हम किसी अन्य व्यक्ति को अपने सोच पर हावी नहीं होने दे तो इस स्थिति से बच सकते थे । जी हाँ सब कुछ हमारी सोच पर निर्भर करता है । किसी अन्य की सोच को कभी अपनी सोच पर हावी न होने दें । ये जीवन हमारा है और स्वयं हम ही इसके मालिक हैं इसलिये हमें किसके साथ जुड़ कर आगे बढ़ना है और किसके साथ नहीं ये निर्णय हमारा होना चाहिये किसी और का नहीं……

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