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मीत बनारसी

एक वैलेंटाइन डे ऐसा भी….

आज के इस आधुनिकतावादी युग में अक्सर लोगों की ज़ुबान पर एक शब्द सुनायी देता है ‘ वैलेंटाइन डे ‘ जी हाँ यह वैलेंटाइन डे समूचे विश्व में १४ फ़रवरी को मनाया जाता है । जहाँ तक मुझे समझ आता है वैलेंटाइन शब्द का अर्थ ‘ एक सच्चा साथी’ होता है जो कि हमारे जीवन में प्रेरक, प्रेम तथा भावनात्मक संबंधों का पूरक होता है ।अगर इस शब्द के अर्थ पर ग़ौर करें तो हम यह कह सकते हैं कि इस दिन को हम अपने सच्चे साथी के साथ मनाते हैं लेकिन ये बात अगर सत्य है तो सच्चे साथी का साथ एक ही दिन क्यूँ ? सच्चा साथी तो वो होता है जो हर सुख दुःख में , जीवन के हर कदमपर हमारे साथ रहता है । आजकल के इस आधुनिक युग में वैलेंटाइन का आशय विपरीत लिंग के प्रति भौतिक आकर्षण तक सीमित हो कर रह गया है ।हर शख़्स अपनी दुनियाँ में व्यस्त है, किसी को भी इतनी फ़ुर्सत शायद ही मिलती हो कि वो हर पल हमारे साथ हो लेकिन हम इस पाश्चात्य सभ्यता की चकाचौंध में क्षणिक प्रेम व सहानुभूति दिखाने वाले व्यक्तित्व को अपना वैलेंटाइन मान लेते है जबकि वास्तव में जो हमारे हर सुख दुख में प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से हमारे साथ रहते हैं वो हैं हमारे माता पिता, जिन्हें हम उनकी वृद्धावस्था में अपनी मसरूफ़ियत की दुहाई देते हुए वृद्धाश्रम में छोड़ आते हैं और ढूँढते रहते हैं एक ऐसा वैलेंटाइन जो हमारे साथ वैलेंटाइन डे
मना सके ।
ज़रा शांत दिमाग़ से अगर सोचें तो पायेंगे कि हमारे माता पिता ने भी हमारा वैलेंटाइन बनकर हमारे हर दुख और परेशानियों को अपना मानकर इस उम्मीद से हमसबका पालनपोषण किया होगा कि उन्हें भी एक दिन वैलेंटाइन की ज़रूरत अवश्य होगी । सच माने तो यदि हम इस पाश्चात्य संस्कृति को भूलकर माता पिता एवं समाज के अन्य असहाय लोगों का सहारा बन जायें तो हमारा हर दिन वैलेंटाइन डे बन जायेगा और उनकी दुआयें एवं आशीर्वाद हमारे लिये जीवनभर हमारे वैलेंटाइन बनकर हरकदम पर हमारा साथ देंगे तो आइये इसबार एक वैलेंटाइन डे ऐसे भी मनाकर देखें ।

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