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मीत बनारसी

शाम को बरामदे में चाय की चुस्कियाँ लेते लेते अचानक कुछ लिखने का ख़्याल मन में आने लगा और मैं हाथ में चाय का कप लिये कमरे में आकर अपने स्टडी टेबल पर आकर बैठ गयी । कप मेज़ पर रखकर कलम उठाई और सोचने लगी कि किस विषय पर लिखूँ… मन में एक साथ न जाने कितने विषय एक साथ उपजने लगे । कुछ देर सोचने के बाद भी अनिश्चितता बरकरार रही फिर यह निर्णय लिया कि क्यूँ न आज ‘ अनिश्चितता ‘ पर ही कुछ लिखा जाये । सच ही तो है कि इस शब्द का हम सबके जीवन से अटूट सम्बंध है । जी हाँ जीवन में कब क्या हो जाये कुछ पता नहीं । हम सब कुछ न कुछ पाने के लिये जीवन की दौड़ में दौड़े जा रहे हैं लेकिन हमें अपनी मंज़िल कब मिलेगी कुछ भी निश्चित नहीं , लेकिन हमें इसी अनिश्चितता को अपनी ताक़त बनाकर चलते जाना है । जैसे जैसे हम अपनी मंज़िल के क़रीब आते जायेंगे ये अनिश्चितता रूपी अंधकार क्षीण होता जायेगा और हमें हमारी मंज़िल दिखाई देने लगेगी । इसलिये जीवन में सदैव सकारात्मक रहें क्योंकि सकारात्मकता ही अनिश्चितता पर विजय का मंत्र है ।

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